समस्तीपुर: शिक्षा विभाग ने भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ अपनी सख्त नीति के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर के तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कृष्णदेव महतो पर कड़ा दंड लगाया है।

विभाग ने उनकी पेंशन में 40 प्रतिशत की स्थायी कटौती का आदेश जारी किया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कृष्णदेव महतो के कार्यकाल के दौरान कई गंभीर आरोप सामने आए थे।

इनमें सबसे प्रमुख आरोप विभूतिपुर प्रखंड में 8 फर्जी बीपीएससी शिक्षकों की बहाली से संबंधित है। जांच में यह बात सामने आई कि बिना नियमानुसार सत्यापन के इन शिक्षकों का योगदान कराया गया।

विभागीय जांच के क्रम में यह भी पाया गया कि संबंधित पदाधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाया और नियमों की अनदेखी कर फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित कराई।

कई मामलों में नियुक्ति पत्रों का सत्यापन नहीं किया गया और उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई।

पहले से निष्कासित शिक्षकों को पुन: करा दिया योगदान:

जांच रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि कुछ शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई, जबकि कुछ मामलों में पहले से निष्कासित शिक्षकों को पुनः योगदान करा दिया गया।

इसके अलावा, लंबित वेतन भुगतान से जुड़े अभिलेख समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे कर्मचारियों का भुगतान प्रभावित हुआ।

अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेशों का अनुपालन नहीं करना तथा विद्यालयों के निरीक्षण में लापरवाही जैसे आरोप भी जांच में प्रमाणित पाए गए।

कुल मिलाकर अधिकांश आरोपों में अधिकारी की संलिप्तता और गंभीर कदाचार की पुष्टि हुई।विभाग ने इसे सामान्य प्रशासनिक त्रुटि न मानते हुए गंभीर अनियमितता और कदाचार की श्रेणी में रखा है।

बिहार पेंशन नियमावली 2005 के तहत कार्रवाई करते हुए श्री महतो की पेंशन में 40 प्रतिशत की स्थायी कटौती का दंड अधिरोपित किया गया है।

जांच में सामने आया मामला:

जांच के क्रम में विभिन्न विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों ने लिखित रूप से बताया कि तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के मौखिक निर्देश और दबाव के कारण फर्जी शिक्षकों को विद्यालय में योगदान दिलाया गया।

जिन शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, उनमें रंजना कुमारी और ममता कुमारी प्रमुख हैं, जिनका योगदान तरुणियां, नवटोलिया, कोठिया, समसा, विशनपुर सहित कई विद्यालयों में कराया गया।

प्रभारी प्रधानाध्यापकों ने यह भी बताया कि उन्होंने फर्जी शिक्षकों से संबंधित अभिलेख और विवरण प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को उपलब्ध कराए थे, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सूचना देने के बाद भी जांच नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

मामले की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि निरीक्षण के दौरान भी कुछ फर्जी शिक्षक विद्यालयों में उपस्थित पाए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि पूरे मामले में सुनियोजित तरीके से नियमों की अनदेखी की गई।

आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए विद्यालय प्रधानों पर दबाव बनाया और फर्जी शिक्षकों का योगदान सुनिश्चित कराया।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि शिक्षकों के योगदान के बाद आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया।

इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल साधारण प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितता और कदाचार का मामला है, जो विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

इसके अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण आरोप में पंचायत शिक्षिका मंजू कुमारी की प्रतिनियुक्ति को लेकर भी अनियमितता सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय बरकुचवा, मुरियारस्थान, विभूतिपुर में उनकी प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया गया, जबकि वह संबंधित विद्यालय में पदस्थापित ही नहीं थीं।

संचालन पदाधिकारी ने इस आदेश को फर्जी करार दिया है, हालांकि स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आने के कारण इस आरोप की पूर्ण पुष्टि नहीं हो सकी।

तीसरे आरोप में यह बात सामने आई कि एक कथित शिक्षक राजीव कुमार के नियुक्ति पत्र के सत्यापन के लिए विद्यालय की प्रधानाध्यापिका द्वारा बार-बार लिखित और मौखिक अनुरोध किया गया, लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इससे यह संकेत मिलता है कि सत्यापन प्रक्रिया को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top