समस्तीपुर/शाहपुर पटोरी: समस्तीपुर के पटोरी प्रखंड स्थित शिउरा गांव इन दिनों आस्था और परंपरा का बड़ा केंद्र बन गया है।
निषाद समुदाय की राष्ट्रीय तीर्थस्थली के रूप में पहचान रखने वाले इस स्थल पर बाबा अमर सिंह के जयघोष के साथ राजकीय शिउरा मेले की शुरुआत होते ही हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं।
मेला शुरू होते ही पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंग गया है। वाया नदी के तट पर स्थित प्राचीन मंदिर में श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंच रहे हैं।
गुरुवार को भूमि सुधार उपसमाहर्ता रोहित कुमार ने विधिवत उद्घाटन किया, जिसके बाद पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला तेज हो गया।
इस मेले की सबसे खास बात बाबा अमर सिंह का दुग्धाभिषेक है, जिसके लिए हजारों लीटर दूध चढ़ाया जा रहा है। रामनवमी के अवसर पर यह अनुष्ठान और भी भव्य रूप ले लेता है, जब देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु अपने आराध्य की पूजा में शामिल होते हैं।

शिउरा मेला सिर्फ स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाला धार्मिक समागम है। यहां तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड समेत एक दर्जन से अधिक राज्यों से लोग पहुंचते हैं।
माथे पर कलश लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतारें इस आस्था की गहराई को दर्शाती हैं। यहां की एक विशेष मान्यता भी लोगों को आकर्षित करती है। कहा जाता है कि कुष्ठ रोग से पीड़ित लोग यहां रहकर बाबा अमर सिंह की आराधना करते हैं तो उन्हें राहत मिलती है।
इसी विश्वास के साथ हर साल कई रोगी भी इस मेले में पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में रहकर पूजा-अर्चना करते हैं। बाबा अमर सिंह की महिमा केवल बिहार तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी उन्हें आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है।
लोककथाओं के अनुसार, उनका जन्म एक चमत्कारिक घटना से जुड़ा हुआ है और उन्होंने अपने जीवनकाल में देशभर का भ्रमण करते हुए लोगों के कष्ट दूर किए।
शिउरा स्थित मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुआं भी है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से पूजते हैं। मान्यता है कि यहां बाबा से जुड़ी कई रहस्यमयी कथाएं जुड़ी हैं, जो इस स्थल की आस्था को और गहरा बनाती हैं।
हर साल की तरह इस बार भी शिउरा मेला आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा है, जहां देश के कोने-कोने से आए लोग एक ही विश्वास में बंधे नजर आ रहे हैं।