समस्तीपुर: समस्तीपुर सुकन्या जिला बनेगा। केंद्रीय संचार मंत्रालय की सहमति से समस्तीपुर डाक प्रमंडल में इसकी पहल हुई है।

सुकन्या जिला बनाने का उद्देश्य बालिकाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर उनकी शिक्षा, शादी और अन्य महत्वपूर्ण खर्चों के लिए आर्थिक सहायता दिलाना है।

पांच साल से नीचे की बच्चियों के लिए डाक विभाग की यह लाभकारी पहल है। डाक अधीक्षक राबिन चंद्र के अनुसार, समस्तीपुर को पहला सुकन्या जिला बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

मार्च से पहले सुकन्या जिला की सहमति मिलने की उम्मीद है। इसके लिए पूरे जिले में पांच साल से नीचे की बच्चियों को चिह्नित किया जाएगा, जिनका आधार कार्ड बना कर सुकन्या समृद्धि खाता संबंधित डाकघर में खोला जाएगा।

जिले में पांच साल से नीचे की बच्चियों को चिह्नित किया जा रहा है, जिनका आधार कार्ड बना कर सुकन्या समृद्धि खाता योजना हर डाकघर में खोला जाएगा।

फिलहाल, समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र में पांच साल से नीचे की कुल साढ़े चार हजार बच्चियों को चिह्नित करने का काम पहले फेज में पूरा हो चुका है।

दूसरे फेज में हर ग्रामीण डाकघर के अंतर्गत आने वाले इलाकों की बच्चियों को चिह्नित कर उनका घर-घर जाकर आधार कार्ड बनाया जाएगा।

साथ ही आधार के आधार पर उनका निकट के ग्रामीण डाकघरों में सुकन्या समृद्धि खाता खोला जाएगा। सुकन्या समृद्धि योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का हिस्सा है।

छोटी-छोटी बचत से बन सकते आत्मनिर्भर:

डाक अधीक्षक बताया कि सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा जरिया है। डाक विभाग की ओर से विभागीय समायोजन को मजबूत करने के लिए मेगा ड्राइव चलाया जा रहा है।

इसका मुख्य थीम डाकघर खाता हर घर, घर-घर डाकघर है। इसके तहत बीमा ग्राम, बचत ग्राम और सुकन्या ग्राम बनाया जा रहा है। डाकघर में निवेश सबसे अच्छा है। छोटी-छोटी बचत से लोग आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

बेटियों का उपहार मानकर खाता खुलवाएं अभिभावक:

केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना बालिकाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। जिले में अब तक 86 हजार से अधिक बालिकाओं के खाते खोले गए हैं।

योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए डाक विभाग की ओर से समृद्ध सुकन्या, समृद्ध समाज, समृद्ध नारी समाज योजना का अभियान चलाया जा रहा है।

सुकन्या योजना के तहत 250 रुपये में 0 से 10 वर्ष की बालिकाओं के खाते खोले जाते हैं। वर्ष में एक बार ही धनराशि जमा करने का नियम है।

खाताधारक को 15 वर्ष तक धनराशि जमा की जाती है। 21 वर्ष बाद इस खाते से संपूर्ण भुगतान कराया जा सकता है। यह भुगतान खाताधारक को ही किया जाता है।

इस योजना से जुड़ी बालिकाओं को उच्च शिक्षा दिलाने में अभिभावकों को बड़ी राहत मिलती है। आयकर की धारा-80 सी के तहत खाताधारक के अभिभावक को आयकर में डेढ़ लाख रुपये की छूट मिलती है।

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