समस्तीपुर: जिले में किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार की ओर से फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह अभियान आधे से अधिक किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।

पूर्वजों के नाम पर अब भी जमाबंदी दर्ज होने के चलते 48 प्रतिशत से भी कम किसानों की फार्मर आईडी बन पाई है। इस स्थिति ने कृषि विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जिले में करीब 2 लाख 42 हजार 911 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें अब तक केवल 1 लाख 25 हजार 385 किसानों की ही फार्मर आईडी बन सकी है।

जमीन के बंटवारे से जुड़े कागजात, आधार में नाम की त्रुटि, मोबाइल नंबर की गड़बड़ी और ई-केवाईसी जैसी समस्याएं इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं।

अधिकारियों और कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाने का प्रयास किया जा रहा है, इसके बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है।

जिला कृषि पदाधिकारी सुमित सौरभ ने किसानों से ई-केवाईसी और निबंधन जल्द पूरा कराने की अपील की है, ताकि वे आगे भी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।

पूर्वजों के नाम पर भूमि होना मुख्य कारण:

फार्मर आईडी नहीं बन पाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि बड़ी संख्या में किसानों की भूमि अब भी उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति के नाम जमीन की रसीद कटती है, वही फार्मर आईडी से जुड़ सकता है।

इस वजह से वर्षों से खेती कर रहे कई किसान अब अपात्र की स्थिति में आ गए हैं। करीब 15 प्रतिशत मामलों में आधार कार्ड और भूमि रसीद में नाम की असमानता भी फार्मर आईडी निर्माण में बाधक बन रही है।

इसके अलावा, रोजगार के सिलसिले में बाहर रह रहे किसानों, मोबाइल नंबर पंजीकरण में गड़बड़ी और पुराने पंजीकरण के कारण भी समस्या जटिल बनी हुई है।

पीएम किसान योजना के तहत पहले दर्ज नाम फार्मर आईडी निर्माण में कारगर साबित नहीं हो रहे हैं, जिससे आगे योजना का लाभ मिलने पर संशय बना हुआ है।

दस्तावेजी अड़चनों से बढ़ी चिंता:

युवा किसान बलराम मिश्र का कहना है कि सरकार को किसानों के हित में पूर्वजों के नाम दर्ज भूमि पर भी फार्मर आईडी बनाने का स्पष्ट निर्देश देना चाहिए, ताकि सहायता राशि बाधित न हो।

वहीं किसान गौतम यादव ने बताया कि किसान सलाहकारों से लेकर राजस्व कर्मचारी और रोजगार सेवक तक लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी और दस्तावेजी अड़चनों के कारण समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है।

कुल मिलाकर, फार्मर आईडी निर्माण की धीमी रफ्तार ने समस्तीपुर के हजारों किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्हें आने वाले समय में सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होने का डर सता रहा है।

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