समस्तीपुर: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से संचालित गुरु-शिष्य हस्तशिल्प प्रशिक्षण योजना कारगर साबित हो रही है।
जिले में इस योजना के तहत महिलाओं को नीटिंग क्राफ्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे घर बैठे ही स्वरोजगार शुरू कर सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को क्रोशिया और बुनाई से जुड़ी पारंपरिक कलाओं की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इसमें फूल, सजावटी सामग्री, बच्चों के खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुएं समेत कई उत्पाद तैयार करना शामिल है।
प्रशिक्षण ले रही महिलाओं में इस कला को सीखने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। यह हुनर न सिर्फ रचनात्मक संतुष्टि दे रहा है, बल्कि भविष्य में आय का स्थायी साधन बनने की उम्मीद भी जगा रहा है।
उद्योग विभाग करेगा विपणन की व्यवस्था:
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री की जिम्मेदारी जिला उद्योग विभाग उठाएगा। कॉमन फैसिलिटी सेंटर के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया जाएगा।

इसके अलावा उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान, पटना और खादी ग्राम उद्योग केंद्रों के सहयोग से भी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे महिलाओं को उचित मूल्य मिल सके।
पहले चरण में 30 महिलाओं को प्रशिक्षण:
कार्यक्रम की मुख्य प्रशिक्षक अनामिका शर्मा ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में जिले की 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
फिलहाल क्रोशिया क्राफ्ट पर फोकस किया गया है, जबकि आगामी चरणों में महिलाओं को 18 प्रकार के हस्तशिल्पों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें मिथिला पेंटिंग, सीकी आर्ट, बैग पर्स निर्माण, स्वेटर और बेबी ड्रेस डिजाइनिंग जैसे हुनर शामिल होंगे।
प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं घर से ही उत्पादन शुरू कर सकेंगी। योजना से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सजावटी वस्तुएं बनाकर वे प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी कर सकती हैं।
सजावटी वस्तुएं बनाने में दक्ष हो रहीं महिलाएं:
प्रशिक्षण ले रहीं सुदेवी ने बताया कि उन्हें क्रोशिया से फूल और अन्य सजावटी सामग्री बनाना सिखाया गया है, जिससे वे घर बैठे काम शुरू करेंगी।
वहीं कंचन कुमारी ने कहा कि उन्होंने मछली, कछुआ सहित कई आकर्षक आकृतियां बनाना सीख लिया है, जिससे खाली समय का सदुपयोग कर आय अर्जित कर सकेंगी।