नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर पिछले एक साल से चल रही वार्ता की सफल समाप्ति के बाद दोनों देशों ने शुक्रवार देर रात साझा बयान जारी कर दिया।

इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर जुर्माने के रूप में लगने वाला 25 प्रतिशत का शुल्क तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गया।

अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत का शुल्क लगा रखा था इनमें 25 प्रतिशत जुर्माने के रूप में तो 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क के रूप में है। पारस्परिक शुल्क के रूप में लग रहे 25 प्रतिशत का शुल्क समझौते के मुताबिक अब 18 प्रतिशत हो जाएगा।

अगले तीन-चार दिनों में अमेरिका इस संबंध में कार्यकारी आदेश जारी कर देगा। समझौते के मसौदे पर अगले माह के मध्य तक दोनों देश हस्ताक्षर करेंगे। उसके बाद भारत फिर से शुल्क को 18 प्रतिशत से भी कम करने पर बातचीत कर सकता है।

30 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार देश है। भारत ने पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक अमेरिका में 86 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

अमेरिका से 40 अरब डॉलर का आयात किया गया था। इसलिए अमेरिका का बाजार भारत के लिए काफी अहम है।

इस मौके पर वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक बार फिर से दोहराया कि समझौते में कृषि व डेयरी सेक्टर को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है और किसी भी ऐसे आइटम को शामिल नहीं किया गया है जिससे देश के किसान और छोटे उद्यमियों का कोई नुकसान हो।

गोयल ने बताया कि अब 44 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर अमेरिका के बाजार में कोई शुल्क नहीं लगेगा। इनमें स्मार्टफोन, जेनेरिक दवा, जेम्स व डायमंड, एयरक्राफ्ट्स के पार्ट्स समेत कई कृषि व बेकरी आइटम है।

30 अरब डॉलर के निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा और बाकी के 12 अरब डॉलर के निर्यात जिनमें स्टील, एल्युमीनियम, विभिन्न पार्ट्स जैसे आइटम शामिल है, पर 50 प्रतिशत का शुल्क है, पर इन आइटम पर दुनिया के सभी देशों के लिए अमेरिका ने 50 प्रतिशत का शुल्क लगा रखा है।

गोयल ने कहा कि अमेरिका के बाजार में चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों से हमारा मुकाबला है, उन सभी पर 18 प्रतिशत से अधिक का शुल्क है। इसलिए हमारे निर्यात में तेज बढ़ोतरी होगी। हम समझते हैं कि भारत जल्द ही अमेरिका के बाजार में 300 अरब डॉलर का निर्यात करने लगेगा।

दूसरी तरफ, भारत ने अमेरिका के औद्योगिक आइटम और कुछ कृषि पदार्थों समेत विभिन्न ड्राइ फ्रुट्स पर शुल्क को कम किया है या फिर उसे शून्य कर दिया है।

अमेरिका में बनने वाली हार्ले डेविडसन जैसी 800 से 1500 सीसी की क्षमता वाली बाइक पर शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया।

अब तक हार्ले डेविडसन पर 50 फीसद शुल्क लगता था। 3000 सीसी वाली कार के आयात पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 30 प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। लेकिन इलेक्ट्रिक कार के आयात में कोई राहत नहीं दी गई है।

अमेरिकी अल्कोहल पर भी चरणबद्ध तरीके से शुल्क को कम किया जाएगा। कॉटन व सेब के साथ सोयाबीन तेल के आयात शुल्क में राहत दी गई है, लेकिन अमेरिकी सेब के आयात के लिए 80 रुपए प्रतिकिलोग्राम प्लस 25 प्रतिशत शुल्क की शर्त रखी गई है।

मतलब 100 रुपए प्रति किलोग्राम से नीचे के मूल्य पर सेब का आयात नहीं हो सकेगा। लंबे काटन का उत्पादन भारत में कम है जो टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जरूरी है, इसलिए उसके आयात की इजाजत दी गई है।

अमेरिका कंप्यूटर से संबंधित वस्तुएं और सेमीकंडक्टर उपकरण, हार्ट, लंग्स जैसे अंग की जांच में काम आने वाले मेडिकल उपकरण, चिप जैसे आइटम का निर्यात बड़ी मात्रा में करेगा। अमेरिका के जेनेटिकली मोडिफाइड वस्तुओं के लिए भारत ने अपना दरवाजा नहीं खोला है।

अमेरिका के बाजार में जिन प्रमुख वस्तुओं का जीरो शुल्क पर होगा निर्यात:

स्मार्टफोन, जेनेरिक दवा, एयरक्राफ्ट्स के पार्ट्स, जेम-डायमंड, होम डेकोर, इनआर्गेनिक केमिकल्स, सिल्क, घड़ी, कई प्रकार की सीड, मसाला, चाय, काफी, खोपरा, तेल, केला, अमरूद, आम, पपीता, मशरूम व अन्य विभिन्न प्रकार के सब्जी-फल, अनानास जैम, बेकरी के कई आइटम व कोका से संबंधित वस्तुएं ।

भारत ने किन-किन आइटम को अमेरिका के लिए नहीं खोला है?

जेनेटिकलि मोडिफाइड कोई वस्तु नहीं, मांस, पोल्ट्री, सोयाबीन, मक्का, डेयरी वस्तुएं, चावल, गेहूं, चीनी, मिलेट, बाजरा, रागी, कोदो, केला, स्ट्रोबेरी, चेरी, साइट्रस फल, ग्रीन चाय, मुंग, काबली चना, तिलहन, मधु, एथनाल, तंबाकू ।

18 प्रतिशत शुल्क होने से भारत के जिन सेक्टर के निर्यात को होगा अधिक फायदा। टेक्सटाइल, लेदर आइटम व फुटवियर, जेम्स व ज्वैलरी, केमिकल्स, खिलौना, स्पोर्ट्स गुड्स, कृषि व विभिन्न प्रोसेस्ड आइटम ।

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