समस्तीपुर: जिले की महिलाएं अब हर क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिख रही है। खासकर मशरूम की खेती कर न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणाश्रोत बन रही हैं।
जिले में 2 हजार से अधिक जीविका दीदियों को मशरूम की खेती और उससे बनने वाले उत्पादों का प्रशिक्षण दिया गया है। वर्तमान में 1,380 जीविका दीदियां आइस्टर मशरूम की खेती कर रही है, जिससे प्रति दीदी 45 किलो तक का उत्पादन हो रहा है।
वहीं 47 जीविका दीदियां बटन मशरूम उगा रही हैं, जिससे वे 2.5 क्विंटल से अधिक उत्पादन कर रही है। इनकी मेहनत अब रंग ला रही है, जिससे इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

मशरूम से बने उत्पादों से हो रही अच्छी कमाई :
जीविका दीदियां अब मशरूम से अलग-अलग उत्पाद बनाकर भी अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। 15 से अधिक जीविका दीदी मशरूम से बने उत्पाद जैसे मशरूम अचार, पाउडर और मसाले तैयार कर बाजार में बेच रही हैं।
इससे वे हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं। खास बात यह है कि ये महिलाएं पूरी तरह जैविक विधि से मशरूम की खेती कर रही हैं, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में इनकी मांग भी बढ़ रही है।
पूसा कृषि विश्वविद्यालय का रहा है महत्वपूर्ण योगदान :
जीविका प्रबंधक विक्रांत शंकर सिंह ने कहा कि बीते वर्षों में समस्तीपुर की महिलाओं के बीच मशरूम की खेती को बढ़ावा देने में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मशरूम विभाग ने अहम भूमिका निभाई है।
विश्वविद्यालय ने इन महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। आज समस्तीपुर की ये महिलाएं मशरूम की खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं और महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रही हैं।