समस्तीपुर: राज्य सरकार द्वारा पेश बजट में किसानों के लिए विशेष योजनाएं दी गई है। इसके साथ ही हल्दी उत्पादक जिले में हल्दी प्रसंस्करण इकाई लगाने पर भी बल दिया गया है। इससे एक बार फिर समस्तीपुर में हल्दी उत्पादकों के दिन बहुरने की उम्मीद है।
पूर्व से ही यहां बीज शोधन के साथ हल्दी के विभिन्न उत्पादों पर काम शुरू है। हल्दी दर्जनों लोगों को रोजगार देने के साथ किसानों की आर्थिक सेहत सुधार रही है।
उन्हें अच्छी कीमत मिल रही है। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के तहत समस्तीपुर को हल्दी के लिए चुना था।
खेती के साथ इससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हल्दी की उत्पादकता को देखते हुए प्रोसेसिंग उद्योग के लिए 43 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन भी किया था, इनमें 11 से अधिक को स्वीकृति भी मिल गई है।
जल्द ये उद्योग काम करने लगेंगे। इससे किसानों को फायदा होने के साथ जिले के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

पांच हजार हेक्टेयर में खेती:
जिले में फिलहाल पांच हजार हेक्टेयर में हल्दी की खेती होती है। छोटे-बड़े करीब 10 हजार किसान इससे जुड़े हैं। हर साल करीब पांच लाख टन हल्दी का उत्पादन होता है। जिले में इसके व्यापार का बड़ा केंद्र वारिसनगर बाजार समिति की मसाला मंडी है।
यहां सूबे के साथ बंगाल और नेपाल के भी व्यापारी आते हैं। खुली मंडी होने के कारण भाव स्थिर नहीं होता है। उम्मीद है कि नई योजना से हल्दी व इसके उत्पाद को बड़ा बाजार मिलेगा।
कृषि विभाग देगा खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा:
चयनित उत्पाद पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार वित्तीय सहायता प्रदान कर रही। उद्योग लगाने पर 35 प्रतिशत अनुदान का प्रविधान है। स्वीकृत 11 उद्योगों को इसका लाभ मिलेगा। 32 के आवेदन भी जल्द स्वीकृत हो जाएंगे।
मार्केटिंग में भी सहयोग किया जाएगा। दूसरी ओर, कृषि विभाग भी इसकी खेती को बढ़ावा दे रहा है। जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार का कहना है कि खेती से रोजगार के अवसर के साथ किसान आत्मनिर्भर बन सकें, इसकी कोशिश हो रही।
खेती में आने वाली दिक्कतें दूर की जा रही हैं। इससे नए किसान भी हल्दी की खेती के लिए प्रेरित होंगे। सरकार के नए बजट से हल्दी उत्पादकों के दिन और बेहतर होने की उम्मीद है।