पटना: बुलेट ट्रेन केंद्रीय बजट 2026 में घोषित वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बिहार के लिए बड़ी कनेक्टिविटी परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है।

यह बुलेट ट्रेन बिहार की तस्वीर एक झटके में बदल देगी, ऐसा कहना भले जल्दबाजी हो, लेकिन इससे कई जिलों को विकास की नई दिशा जरूर मिलेगी। खासकर बक्सर, भोजपुर और पटना जैसे जिले इस कॉरिडोर से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

बक्सर से बिहार में करेगी एंट्री:

फाइनल सर्वे के अनुसार हाई-स्पीड रेल बिहार में बक्सर से प्रवेश करेगी। इसके बाद भोजपुर, पटना, बेगूसराय, कटिहार और किशनगंज से गुजरते हुए यह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगी।

बक्सर, उदवंतनगर, पटना, कटिहार और किशनगंज में संभावित स्टेशनों से इन इलाकों की राष्ट्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी:

अभी वाराणसी से सिलीगुड़ी की यात्रा में औसतन 15 से 17 घंटे का समय लगता है। बुलेट ट्रेन के परिचालन के बाद यही दूरी करीब 4 घंटे में पूरी की जा सकेगी।

वहीं, पटना से वाराणसी और आगे दिल्ली तक का सफर भी काफी आसान और तेज होगा। इससे बिहार के लोगों के लिए देश की राजधानी और उत्तर-पूर्व भारत तक पहुंच सुगम हो जाएगी।

एलिवेटेड ट्रैक से कम होगा असर:

पूरा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर एलिवेटेड होगा, जिसे जमीन से 12 से 15 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जाएगा। इससे सड़क यातायात और स्थानीय आवाजाही पर सीमित असर पड़ेगा।

भोजपुर जिले में बुलेट ट्रेन करीब 50 किलोमीटर लंबाई में 38 गांवों से होकर गुजरेगी, जिसके लिए लगभग 96 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा:

बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण और संचालन से बिहार में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्टेशनों के आसपास रियल एस्टेट, होटल, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना है।

पटना और आसपास के इलाकों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।

तस्वीर बदलेगी, तकदीर में लगेगा वक्त:

हालांकि, बुलेट ट्रेन से बिहार की तकदीर रातों-रात नहीं बदलेगी। यह परियोजना लंबी अवधि में असर दिखाएगी। बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक गतिविधियों और निवेश के जरिए धीरे-धीरे विकास की रफ्तार बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन बिहार के लिए उम्मीदों की नई पटरी जरूर बिछाएगी, जिस पर विकास की ट्रेन भविष्य में दौड़ेगी।

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