पटना: अमेरिका द्वारा भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के फैसले को बिहार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
उद्योग जगत और आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से बिहार के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात उन्मुख उद्योगों को नई गति मिल सकती है, हालांकि दीर्घकालिक लाभ के लिए गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स और नीति समर्थन पर समान रूप से ध्यान देना होगा।
ऐसोचैम बिहारः कृषि उत्पादों के निर्यात को मिलेगा सीधा लाभ
ऐसोचैम बिहार के अध्यक्ष विवेक साह ने कहा कि टैरिफ में कमी से बिहार के कृषि और खाद्य उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि मखाना, चावल, मक्का, फल-सब्जी, मसाले और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे उत्पादों के निर्यात को इससे प्रोत्साहन मिलेगा। कम टैरिफ के कारण भारतीय उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते होंगे, इससे मांग बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड चेन और निर्यात अवसंरचना को मजबूत किया गया, तो बिहार इस अवसर का अधिकतम लाभ उठा सकता है।

सीए आशीष रोहतगीः लागत घटने से एमएसएमई को राहत
चार्टर्ड अकाउंटेंट आशीष रोहतगी ने कहा कि 18 प्रतिशत टैरिफ तय होने से निर्यात लागत में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ बिहार के एमएसएमई और निर्यातकों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, रेडी-टू-ईट उत्पाद और कृषि आधारित उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ेगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए गुणवत्ता मानक, ट्रेसेबिलिटी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।
बीआईए के पूर्व अध्यक्ष केपीएस केशरी : अवसर के साथ तैयारी भी जरूरी
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केपीएस केशरी ने टैरिफ में कटौती को बिहार के लिए एक अवसर बताते हुए कहा कि इससे राज्य के उद्योगों को वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि कम टैरिफ के बावजूद यदि बिजली दर, लॉजिस्टिक्स लागत और निर्यात सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया, तो अपेक्षित लाभ सीमित रह सकता है।
राज्य सरकार को निर्यात उन्मुख उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन, सस्ती बिजली और भूमि बैंक जैसी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?
कृषि क्षेत्र में किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नए निर्यात ऑर्डर मिल सकते हैं।एमएसएमई और अन्य उद्योगों को लागत में राहत मिलेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।