पटना: इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किला परिसर में आयोजित छह दिवसीय भारत पर्व महोत्सव में सुपर फूड मखाना को केंद्र में रखकर बनाई गई बिहार की झांकी को लोगों ने खूब सराहा और उत्साह में जमकर सेल्फी भी ली।

मिथिला की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा मखाना आज न्यूट्रिशन, मेडिसिन और इंटरनेशनल फूड मार्केट में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर यह उत्पाद स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नई पीढ़ी की पहली पसंद बनता जा रहा है। छह दिवसीय महोत्सव शनिवार को समाप्त हुआ।

भारत में होने वाले कुल मखाना उत्पादन का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिहार से आता है। वर्ष 2012 तक जहां राज्य में लगभग 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 35 हजार 224 हेक्टेयर से अधिक हो चुकी है।

मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और मखाना विकास योजना (2019-20) ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। “स्वर्ण वैदेही” और “सबौर मखाना-1” जैसे उन्नत प्रभेदों के प्रोत्साहन से उत्पादन 56 हजार टन के पार पहुंच चुका है।

इसका सीधा असर किसानों की आय और राज्य की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2005 में जहां मखाना/मत्स्य जलकरों से राज्य को 3.83 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये हो गया है।

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