समस्तीपुर: जिले में पशुपालन को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशुपालन विभाग ने अहम पहल की है। जिले के आठ प्रखंडों में एक-एक कर कुल आठ नए प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय खोले जाएंगे। इसके लिए पंचायतों का चयन कर भूमि से संबंधित रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यालय भेज दी गई है।
पशुपालन विभाग की इस योजना का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं की नस्ल में सुधार और बांझपन जैसी समस्याओं का समाधान भी करना है। नए अस्पताल खुलने से पशुपालकों को इलाज के लिए दूर-दराज भटकना नहीं पड़ेगा और समय पर उपचार मिलने से पशुओं की मृत्यु दर में भी कमी आएगी।
जिले में वर्तमान में 40 पशु अस्पताल संचालित हैं, जबकि पशुओं की कुल संख्या करीब 11.45 लाख है। इनमें लगभग 5.17 लाख गाय, 1.89 लाख भैंस, 4.34 लाख बकरी, 1522 भेड़ और 2330 सूअर शामिल हैं। पशुओं की संख्या के अनुपात में चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने नए अस्पताल खोलने का निर्णय लिया है।
प्रत्येक नए पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सक का आवास भी होगा, जिससे आपात स्थिति में भी इलाज संभव हो सकेगा। साथ ही आधुनिक संसाधनों से लैस इन अस्पतालों में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान और बांझपन निवारण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

इन पंचायतों में बनेंगे पशु चिकित्सालय:
समस्तीपुर प्रखंड के डढ़िया बेलार (कर्पूरीग्राम पंचायत), दलसिंहसराय के पांड, विद्यापतिनगर के साहिट, कल्याणपुर के सैदपुर, खानपुर के खानपुर उत्तरी, वारिसनगर के मोहिउद्दीनपुर, विभूतिपुर के चौरा टभका और हसनपुर प्रखंड के दुधपुरा पंचायत में नए पशु चिकित्सालय का निर्माण किया जाएगा।
प्रत्येक अस्पताल के निर्माण पर लगभग 75 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित अंचल अधिकारियों से न्यूनतम 140 फीट × 120 फीट भूमि और अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया था, जिसकी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है।
बेहतर चिकित्सा सुविधा देने का प्रयास:
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. अमन श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के आठ प्रखंडों में नए प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है और पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।