समस्तीपुर/सरायरंजन: जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर नरघोघी स्थित श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में करीब सवा दो वर्षों के बाद रात्रिकालीन सेवा शुरू कर दी गई है।
इससे स्थानीय मरीजों को आंशिक राहत मिली है और अब सामान्य सर्जरी वाले मरीजों को रात में भी भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
ओपीडी से आगे बढ़ीं सेवाएं:
इस मेडिकल कॉलेज में 21 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा ओपीडी सेवा का उद्घाटन किया गया था। तब से मरीजों को केवल ओपीडी सुविधा ही मिल रही थी।
अब रात्रिकालीन सेवा शुरू होने से इलाज की सुविधा बढ़ी है, लेकिन इमरजेंसी सेवा अब भी शुरू नहीं हो सकी है। गंभीर मरीजों को अब भी सदर अस्पताल या पीएमसीएच रेफर किया जा रहा है।
रोजाना 400 से 500 मरीज पहुंच रहे:
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गुरुवार दोपहर तक ओपीडी में करीब 400 मरीजों का इलाज हो चुका था, जबकि कुछ मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
वहीं, इंडोर में कुल 35 मरीज भर्ती पाए गए, जिनमें 15 नए मरीज शामिल थे। मरीजों का कहना है कि पहले की तुलना में व्यवस्था में सुधार हुआ है।

स्टाफ की भारी कमी बनी बड़ी चुनौती:
अस्पताल प्रशासन के अनुसार संस्थान में 1100 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 90 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इनमें 24 डॉक्टर, 45 नर्स और 7 तकनीकी कर्मी शामिल हैं। इसी कमी के कारण इमरजेंसी सेवा अभी शुरू नहीं हो पा रही है।
सीमित सर्जरी और जांच सुविधाएं उपलब्ध:
फिलहाल अस्पताल में डे-केयर सर्जरी के तहत हाइड्रोसील, हर्निया और घाव-फोड़ा जैसे ऑपरेशन किए जा रहे हैं। स्त्री रोग से संबंधित सर्जरी भी शुरू हो चुकी है।
इसके अलावा यहां 36 प्रकार की जांच और ओपीडी में 232 तथा इंडोर में 80 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
चार माह में इमरजेंसी सेवा शुरू होने की उम्मीद:
अधीक्षक डॉ. पूनम कुमारी के अनुसार इमरजेंसी सेवा को पूरी तरह शुरू करने में अभी लगभग चार माह का समय लग सकता है। 500 बेड क्षमता वाले इस अस्पताल में भविष्य में विस्तार की योजना भी है।
साथ ही 2026-27 सत्र से एमबीबीएस की 100 सीटों पर नामांकन शुरू होने की संभावना जताई गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद:
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही आवश्यक संसाधन और फैकल्टी उपलब्ध हो जाएंगे, यह संस्थान क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन सकता है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां पूरी तरह विकसित चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।