समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले में एनीमिया गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 69.7 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं।
वहीं, छह से 59 महीने तक के 67.2 प्रतिशत बच्चों में भी एनीमिया पाया गया है। यह स्थिति राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों से सामने आई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब आयरन की गोलियों के स्थान पर एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन) थेरेपी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
इस थेरेपी में मरीज को एक बार इंजेक्शन देना होगा, जिससे हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम से कम पाया गया है। वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 65.4 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 67.2 प्रतिशत हो गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कुपोषण और संतुलित आहार की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। जिले में पांच वर्ष तक के केवल 40 प्रतिशत बच्चों को ही पूर्ण आहार मिल पा रहा है, जबकि छह से 23 महीने आयु वर्ग में यह आंकड़ा महज 32.8 प्रतिशत है।
26 मार्च से शुरू होगा अभियान:
एफसीएम थेरेपी अभियान का शुभारंभ गुरुवार को सदर अस्पताल के मातृ शिशु भवन में किया जाएगा। इसके लिए 20 बेड का विशेष वार्ड तैयार किया गया है।
अभियान के संचालन के लिए चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की गई है। जिला अंतर्गत 20 एनीमिक महिलाओं को इंजेक्शन दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि यह पहल जिले में एनीमिया नियंत्रण की दिशा में प्रभावी साबित होगी। सदर अस्पताल की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अदिति प्रियदर्शनी, अनुमंडलीय अस्पताल रोसड़ा के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार राकेश एवं ग्रेड ए नर्स पुष्पलता कुमारी को लगाया गया है।