समस्तीपुर/दलसिंहसराय: सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यूजीसी 2026 के नए नियमों पर रोक लगा दी है, जिससे देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में लागू होने वाली नई गाइडलाइंस का मार्ग अस्थायी रूप से रुक गया है।
ये गाइडलाइंस बहुजन और पिछड़े छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा, जातीय भेदभाव पर रोक और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के मकसद से बनाई गई थीं।
हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि यह कानून एकतरफा और एक पक्षीय था, जिससे छात्रों के हित प्रभावित हो सकते थे। लेकिन अब इसपर विवाद बढ़ता जा रहा है।
बता दें कि समस्तीपुर के दलसिंहसराय में आइसा कार्यकर्ताओं और बहुजन छात्रों ने शहर को अम्बेडकर कल्याण छात्रावास से नारे लिखी तख्तियों, झंडों और बैनरों के साथ जुलूस निकाला।
यूजीसी गाइडलाइंस लागू करने तथा बहुजन व पिछड़े छात्रों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग को लेकर निकला यह जुलूस महावीर चौक होते हुए एनएच-28 चौराहे पर सभा में बदल गया।

सभा की अध्यक्षता नितीश कुमार ने की। संचालन उदय कुमार ने किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “अत्याचार अधिकार नहीं है”, “जातीय भेदभाव बंद करो”, “यूजीसी गाइडलाइंस लागू करो” और “रोहित एक्ट लागू करो” जैसे नारे लगाए।
आइसा जिला सचिव सुनील कुमार सिंह ने कहा कि आइसा और बहुजन छात्रों के वर्षों के संघर्ष का परिणाम था यूजीसी गाइडलाइंस-2026 का लागू होना।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा कैंपस में जातीय भेदभाव रोकने वाली इन गाइडलाइंस पर रोक लगाने का फैसला सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई को कमजोर करता है।
उन्होंने बताया कि यूजीसी ने ही देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 118 प्रतिशत भेदभाव के मामले दर्ज किए हैं, जो इन गाइडलाइंस की आवश्यकता को प्रमाणित करता है।
उदय कुमार ने कहा कि रोहिथ वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों की मौतें संस्थागत जातीय व सामाजिक भेदभाव का प्रमाण हैं। इन्हें व्यक्तिगत मामला बताकर टालना अन्यायपूर्ण है।
नीलकमल और आइसा जिलाध्यक्ष लोकेश राज ने कहा कि एंजेल चकमा जैसी हालिया घटनाएं नस्लीय व जातीय पूर्वाग्रह की मौजूदगी दर्शाती हैं।
कार्यक्रम में आइसा सचिव नीतीश राणा, उमेश राम, कुंदन पासवान, निलकमल यादव, मो. फरमान, दीपक यदुवंशी, कुंदन यादव, मिंटू राम, नितीश, रवि, रमेश राम, अमर शाह, राजकुमार रंजन, कुंदन, सोनू, राहुल, विमय, मो. खलील आदि उपस्थित रहे।