समस्तीपुर: ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और पलायन की समस्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना विकसित भारत-जी राम जी (ग्रामीण) को वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है।
इसको लेकर जिले में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
आधार पर राशि की उपलब्धता:
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी प्रस्तावित योजनाओं की एंट्री अनिवार्य रूप से युक्तधारा पोर्टल पर कराई जाए।
जिन योजनाओं का पंजीकरण होगा, उन्हीं पर आगे काम किया जाएगा और उसी आधार पर राशि की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक:
योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के ऐसे वयस्क सदस्य, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, उन्हें वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी आधारित रोजगार की गारंटी मिलेगी। संभावना है कि योजना की शुरुआत अप्रैल माह से की जाएगी।
पलायन को कम करने में महत्वपूर्ण:
डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में आय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह मिशन एक अहम कदम है।

कर्मियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण:
योजना के शुभारंभ से पहले पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के कर्मियों और पदाधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इससे कार्य शुरू होने पर किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न न हो। सभी आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि अप्रैल से योजना को जमीन पर उतारा जा सके।
गांवों में होगा दीवार लेखन और प्रचार:
योजना के संचालन के लिए जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक और प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी जिम्मेदारी निभाएंगे।
ग्राम पंचायतों को श्रमिकों के पंजीकरण, जॉब कार्ड जारी करने और कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जागरूकता बढ़ाने के लिए पंचायतों में दीवार लेखन, होर्डिंग लगाने और पंपलेट वितरण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग योजना से जुड़ सकें।
जलवायु और आधारभूत संरचना पर रहेगा फोकस:
इस योजना के तहत होने वाले सभी कार्य विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना का हिस्सा होंगे। जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्य योजनाएं विकसित ग्राम पंचायत आयोजना के माध्यम से तैयार की जाएंगी और इन्हें पीएम गति-शक्ति जैसी राष्ट्रीय योजना प्रणालियों से जोड़ा जाएगा, ताकि संसाधनों का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग हो सके। कृषि क्षेत्र को भी इस कार्यक्रम में विशेष महत्व दिया गया है।