समस्तीपुर/पूसा: उत्तर बिहार के जिलों में अभी ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। मौसम शुष्क रहने के साथ ही छह जनवरी तक कोल्ड डे की स्थिति बनी रह सकती है। सुबह में मध्यम स्तर का कुहासा छाया रह सकता है। दिन चढ़ने के साथ मौसम सामान्यतः साफ रहने की संभावना है।

दूसरी तरफ उत्तर बिहार के जिलों में सबसे ज्यादा ठंड शुक्रवार को दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान गिरकर 4.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह पिछले 27 वर्षों में न्यूनतम तापमान का एक रिकार्ड बताया जा रहा है।

डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार, वर्ष 1998 के बाद पहली बार इतनी कम तापमान की स्थिति बनी है। यह सामान्य से 5.9 डिग्री कम है।

मौसम विभाग का बताना है कि शुक्रवार का अधिकतम तापमान 19.2 एवं न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। अधिकतम तापमान सामान्य से 2.0 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री कम रहा।

डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा द्वारा तीन से सात जनवरी तक के लिए मौसम बुलेटिन जारी किया गया है।

मौसम वैज्ञानिक डा. ए सत्तार ने बताया कि इस अवधि में अधिकतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 7 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

पूर्वानुमति अवधि में औसतन तीन-छह किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पछिया हवा चल सकती है। सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 90 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 45 से 50 प्रतिशत रहने की संभावना है।

पिछले तीन दिनों का मौसम आकलन:

मौसम वैज्ञानिक के अनुसार पिछले तीन दिनों में औसत अधिकतम तापमान 16.3 डिग्री सेल्सियस तथा औसत न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इस अवधि में औसत सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 83 प्रतिशत रही।

हवा की औसत गति 6.3 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई, जबकि दैनिक वाष्पन 1.3 मिलीमीटर रहा। इस दौरान सूर्य प्रकाश की अवधि काफी कम रही और मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा।

किसानों के लिए जरूरी सलाह:

कृषि वैज्ञानिक ने रबी फसलों में रोग व कीट पर नियमित निगरानी की सलाह दी है। आलू, टमाटर, धनिया, लहसुन सहित अन्य रबी फसलों में झुलसा रोग की संभावना को देखते हुए समय पर फफूंदनाशक दवाओं के छिड़काव की सलाह दी गई है।

गेहूं की फसल में 30-35 दिन की अवस्था पर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। पछुआ हवा और ठंड के कारण फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करने की अपील की है। पशुपालकों को ठंड को देखते हुए दुधारू पशुओं को ठंड से बचाने, सूखा चारा देने तथा खनिज मिश्रण खिलाने की सलाह दी गई है, ताकि दूध उत्पादन में गिरावट न आए।

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